neem karoli baba kaun the

फेसबुक और एप्पल के मालिक मार्क जुकरबर्ग व स्टीव जॉब्स को राह दिखाने वाले नीम करौली बाबा पश्चिमी देशों में भारत की विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आश्रम देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी लोकप्रिय है। यही कारण है कि प्रतिदिन हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने देश-विदेश से आते हैं।

वैसे तो हिन्दुस्तान में कई पावन तीर्थ स्थल हैं, ऐसा ही एक पावन तीर्थ देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में मौजूद है, जिसे लोग “कैंची धाम” के नाम से जानते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ सिर्फ जाने मात्र से ही लोगों की बिगड़ी तकदीर बन जाती है और उनकी सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। नैनीताल से लगभग 65 किलोमीटर दूर “कैंची धाम” के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे।

नीम करौली बाबा हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। बताया जाता है कि हनुमान जी की कड़ी तपस्या करने के बाद ही उन्हें चमत्कारिक सिद्धियां प्राप्त हुई थीं। बताया जाता है कि सन् 1961 में बाबा यहां पहली बार आए थे और उन्होंने 1964 में एक आश्रम का निर्माण कराया था, जिसे आज हम सब कैंची धाम के नाम से जानते है।

देश के अलावा विदेशों में भी है बाबा के भक्त

नीम करौली बाबा सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने चमत्कार के कारण काफी प्रसिद्ध हैं। मशहूर लेखक रिचर्ड अल्बर्ट ने अपनी पुस्तक ‘मिरेकल ऑफ लव’ में बाबा तथा उनके चमत्कारों के बारें में लिखा है। सिर्फ यही नहीं मशहूर हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्ट्स, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स और फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग सहित कई अन्य विदेशी हस्तियां भी बाबा के अनन्य भक्त हैं।

कौन थे नीम करौली बाबा ?

नीम करौली बाबा का जन्म उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर में रहने वाले एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।

11 वर्ष की उम्र में ही उनका विवाह एक ब्राह्मण कन्या के साथ कर दिया गया था। परन्तु शादी के कुछ समय बाद ही उन्होंने घर छोड़ दिया और साधु बन गए। माना जाता है कि लगभग 17 वर्ष की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी।

घर छोड़ने के लगभग 10 वर्ष बाद उनके पिता को किसी ने उनके बारे में बताया। जिसके बाद उनके पिता ने उन्हें घर लौटने और वैवाहिक जीवन जीने का आदेश दिया। वह तुरंत ही घर लौट आए। कालांतर में उनके दो पुत्र तथा एक पुत्री उत्पन्न हुए। गृहस्थ जीवन के दौरान वह अपने आपको सामाजिक कार्यों में व्यस्त रखा।

1962 के दौरान नीम करौली बाबा ने कैंची गांव में एक चबूतरा बनवाया। जहां पर उन्के साथ पहुंचे संतों ने प्रेमी बाबा और सोमबारी महाराज ने हवन किया।

नीम करौली बाबा हनुमानजी के बहुत बड़े भक्त थे। उन्हें अपने जीवन में लगभग 108 हनुमान मंदिर बनवाए थे। वर्तमान में उनके हिंदुस्तान समेत अमरीका के टैक्सास में भी मंदिर है।

बाबा को वर्ष 1960 के दशक में अन्तरराष्ट्रीय पहचान मिली। उस समय उनके एक अमरीकी भक्त बाबा राम दास ने एक किताब लिखी जिसमें उनका उल्लेख किया गया था। इसके बाद से पश्चिमी देशों से लोग उनके दर्शन और आर्शीवाद लेने के लिए आने लगे।

बाबा ने अपनी समाधि के लिए वृन्दावन की पावन भूमि को चुना। उनकी मृत्यु 10 सितम्बर 1973 को हुई। उनकी याद में आश्रम में उनका मंदिर बना गाया और एक प्रतिमा भी स्थापित की गई।