चाणक्य को बेहद विद्वान माना गया है। चाणक्य शिक्षक होने के साथ साथ अर्थशास्त्र, कूटनीति शास्त्र और समाज शास्त्र जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों के भी जानकार थे। इसके साथ ही चाणक्य ने उन सभी चीजों का भी गंभीरता से अध्ययन किया था जो मनुष्य की सफलता और असफलताओं में अहम भूमिका निभाती हैं।

चाणक्य के अनुसार हर व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है। सफल होने के लिए मनुष्य कठोर परिश्रम करता है। लेकिन कभी कभी प्रतिभा और कठोर परिश्रम के बाद भी व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती है। इसको लेकर चाणक्य ने कुछ बातें बताई हैं, इन बातों को हर व्यक्ति को जानना चाहिए।

इन 4 गुणों को विकसित करें

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को शक्तिशाली, व्यापारी की तरह साहसी, विद्वान और मधुर वाणी बोलने वाला होना चाहिए। ये चार गुणों से पूर्ण व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता है। जिने लोगों में ये चारों गुण पाए जाते हैं वे जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं।

को हि भार: समर्थनां कि दूरं व्यवसायिनाम्
को विदेश: सविद्यानां क: पर: प्रियवादिनाम्.

चाणक्य नीति के इस श्लोक का भाव ये है कि शक्तिशाली व्यक्ति के लिए कोई कार्य कठिन नहीं होता है। व्यापारी के लिए कोई भी स्थान दूर नहीं होता है। इसी प्रकार से विद्वान के लिए कोई भी स्थान दूर नहीं होता है। विद्वान के लिए विदेश भी नजदीक होता है। क्योंकि ऐसे लोगों को हर देश सम्मान देना चाहता है। चौथा गुण है, मधुर वाणी बोलने वालों के लिए कोई भी पराया नहीं है, वह सभी को अपना बना लेता है।

चाणक्य के इस श्लोक में सफलता का मंत्र छिपा है। जो व्यक्ति इन गुणों को अपने भीतर विकसित कर लेता है उसके लिए सफलता आसान हो जाती है। इन गुणों से युक्त व्यक्ति हर कार्य को कर सकता है। बड़े लक्ष्यों को भी आसानी से भेद सकता है। इसलिए जीवन में यदि सफलता प्राप्त करनी है तो इन गुणों को विकसित करो।