kartik maas

हिंदू पंचांग में पूर्णिमा तिथि से तारीख बदलती है। 19 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा थी, जिसके बाद 21 अक्टूबर से कार्तिक मास आरंभ हो जाएगा। कार्तिक मास का समापन 19 नवंबर को होगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद्भागवद् गीता में कहा है कि उन्हें कार्तिक मास अत्यंत प्रिय है और कार्तिक मास उन्हीं का ही एक स्वरूप है। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि महीनों में मैं कार्तिक हूं। मान्यता है कि जो व्यक्ति कार्तिक महीने में उपवास और तपस्या कर ईश्वर की साधना करता है उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में कुछ नियमों का पालन करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। जानिए कार्तिक मास में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

दीपदान जरूर करें –

कार्तिक मास में दीपदान करने से परिवार के सभी सदस्यों के जीवन का अंधकार समाप्त हो जाता हैं । इसलिए इस महीने किसी भी पवित्र नदी या तालाब में सूर्यास्त के समय दीपदान करना ही चाहिए ।

तुलसी पूजा अवश्य करें –

सनातन परंपरा में तुलसी के पौधे को बहुत पवित्र माना गया है. जिसकी पूजा वैसे तो हम सभी पूरे साल करते हैं, लेकिन कार्तिक मास में इसकी आराधना का विशेष महत्व है. आयुर्वेद में तुलसी को रोगहर कहा गया है और दूसरी ओर यह तुलसी यमदूतों के भय से मुक्ति प्रदान करती है. कार्तिक मास में एक मास तक तुलसी के सामने दीपदान करने पर अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है.

भूमि पर सोना चाहिए –

कार्तिक मास भूमि पर सोना भी एक प्रमुख नियम माना गया है. भूमि पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है तथा अन्य विकार भी समाप्त हो जाते हैं.

तेल न लगाये –

कार्तिक महीने में केवल एक बार नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) के दिन ही शरीर पर तेल लगाने की छूट है। बाकी पूरे मास में तेल लगाना पूरी तरह से मना है।

इस माह दाले न खाये –

कार्तिक मास में उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई आदि नहीं खाना चाहिए । इससे जीवन की प्रगति में रूकावटे आने की संभावना बनी रहती है ।

ब्रह्मचर्य का पालन करे –

कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य का पालन अति आवश्यक बताया गया है। इसका पालन नहीं करने पर पति-पत्नी को दोष लगता है और इसके अशुभ फल भी प्राप्त होते हैं।

संयम रखें –

कार्तिक मास का व्रत करने वाल सभी स्त्री पुरूष कम बोले, किसी की निंदा, अपमान या विवाद न करें, अपने मन पर जितना संयम रखेंगे लाभकारी होगा ।