शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। साल में 4 बार नवरात्रि मनाई जाती हैं। दो गुप्त नवरात्रि और दो नवरात्रि जो मुख्य रूप से मनाए जाते हैं। इसमें चैत्र और शारदीय मुख्य रूप से शामिल हैं। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होतीहैं। 9 दिवसीय शारदीय नवरात्रि को लोग बहुत ऋद्धा के साथ मनाते हैं। इस साल 7 अक्टूर से नवरात्रि की शुरुआत हो रही है और 15 अक्टूबर, शुक्रवार को समापन होगा। इसमें मां दूर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों में कोई भी काम बिना पंडित से सुझाए नहीं किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि में पूजा का पूण्य तभी प्राप्त होता है जब विधि पूर्वक पूजा की जाती है। इस दौरान पूजा के नियमों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कहते हैं मां दूर्गा को नियम ज्यादा पसंद हैं। इसलिए नवरात्रि में पूजा की विधि को वरियता दी गई है। बता दें कि नवरात्रि में मां दूर्गा के पूजा में तीन चीजों का विशेष महत्व है। कहते हैं कि अगर इन तीन चीजों में से पूजा में किसी को भी शामिल नहीं किया जाएगा, तो पूजा को पूर्ण नहीं माना जाएगा। आइए जानते हैं कौन-सी हैं वो तीन महत्वपूर्ण चीजें।

  • अखंड ज्योति: नवरात्रि में मां के चरणों में अगर नौ दिन तक अखंड ज्योति जलाएं तो बेहद शुभ होता है। कहते हैं कि अखंड ज्योति जलाने से घर से नकारात्मकता जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश होता है। अखंड ज्योति जलाते वक्त पहले साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। अखंड ज्योत जलाने के लिए पीतल या मिट्टी के दीपक का उपयोग करना चाहिए। अखंड ज्योत के लिए गाय के घी का उपयोग किया जाए तो बहुत अच्छा होता है।
  • लाल रंग: नवरात्रि में माता के पूजन में लाल रंग का विशेष महत्व माना गया गया है। मान्यता है कि लाल रंग मां को बहुत अधिक प्रिय है। इसलिए जब भी शारदीय नवरात्रि में मां की आराधना एवं पूजा करें तो उसमें लाल रंग जरूर शामिल करें। जब घर में घटस्थापना करें तो उस वक्त लाल रंग के वस्त्र का जरूर इस्तेमाल करें। पूजा के दौरान मात को लाल चुनरी और कुमकुम का टीक भी लगाएं।
  • लाल चुनरी: माँ दुर्गा को लाल रंग बहुत प्रिय है इसलिए नवरात्रि में मां दुर्गा को लाल चुनरी भी चढ़ाई जाती है। ऐसा कहते है कि माता को कभी भी सिर्फ चुनरी नहीं चढ़ाना चाहिए। चुनरी के साथ उसके साथ हमेशा श्रृंगार का सामान, फल, मेवा, नारियल और मिष्ठान भी चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होती हैं।