हिंदू कैलेंडर में साल का पांचवां माह सावन का आता है। वर्षाकाल में पड़ने वाले चातुर्मास में सावन एक प्रमुख माह है। यह भगवान शिव का प्रिय माह है, जिस कारण इसे शिव उपासना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। वैसे तो पूरे सावन भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना करने से शिव जी भक्तों की सारी मनोकामना पूरी कर देते हैं, लेकिन सोमवार का दिन भगवान शिव के आराधकों के लिए बहुत खास है। सावन सोमवार के दिन व्रत धारण कर महादेव की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट मिट जाते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अब दूसरा सावन सोमवार व्रत 02 अगस्त को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, सावन के दूसरे सोमवार को नवमी तिथि है और इस दिन कृत्तिका नक्षत्र रहेगा। वहीं चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेगा, जहां पर राहु पहले से ही विराजमान है। राहु और चंद्रमा से इस दिन ग्रहण योग का निर्माण होगा। आइए जानते हैं सावन सोमवार की व्रत विधि, कथा और पूजा नियम के बारे में :

सावन सोमवार व्रत विधि :
  • सावन सोमवार के दिन जल्दी उठकर स्नान करें।
  • शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें।
  • साथ ही माता पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं।
  • पंचामृत से रुद्राभिषेक करें, बिल्व पत्र अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल चढ़ाएं और सभी को तिलक लगाएं।
  • प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी शक्कर का भोग लगाएं।
  • धूप, दीप से गणेश जी की आरती करें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें।
भगवान शिव से भाग्य का वरदान मांगने के लिए ये करें :

कुछ जानकारों के अनुसार यदि तमाम कोशिशों के बावजूद किस्मत आपका साथ नहीं दे रही है, तो ऐसे में सावन के सोमवार के दिन एक खास उपाय आपको भगवान शिव से भाग्य का वरदान दिलाने में मदद कर सकता है।

इसके तहत सावन के हर सोमवार को नियम के अनुसार कुछ खास करना होता है। यदि आपका भी भाग्य साथ नहीं देता है तो ऐसे में :

  • सावन के पहले सोमवार को भक्त को भगवान भोलेनाथ को एक मुट्ठी कच्चा चावल चढ़ाना चाहिए।
  • जबकि दूसरे सोमवार को भक्त शिवलिंग पर सफेद तिल अर्पित करने चाहिए।
  • इसके बाद आने वाले सावन के तीसरे सोमवार को भक्त को महादेव को खड़ी मूंग चढ़ानी चाहिए।
  • वहीं चौथे सोमवार के दिन भक्त को एक मुट्ठी जौ भोलेनाथ को समर्पित करनी चाहिए।
बरतें ये सावधानियां :

शिवजी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।