शनिदेव सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। ये किसी एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए ढाई वर्ष का समय लेते हैं। शनि के राशि परिवर्तन से कुछ राशि पर शनि की साढ़ेसाती और कुछ पर ढैय्या लग जाती है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ भाव में रहते हैं उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शनि के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति के नौकरी, सेहत, धन और दांपत्य जीवन में परेशानी बनी रहती है। वहीं अगर किसी जातक की कुंडली में शनि शुभ भाव में विराजमान हों, तो व्यक्ति का जीवन ऐशोआराम से बीतता है। ऐसे व्यक्ति पर शनि महाराज की विशेष कृपा होती है जिस कारण से वह रंक से राजा भी बन जाता है।

शनिदेव की ढैय्या तथा साढ़ेसाती से मिलने वाले कष्टों को दूर करने के अनेकों उपाय शास्त्रों में बताये गए हैं। ऐसा माना जाता है कि हनुमान जी की पूजा करने से शनि का दोष दूर होता है और जातक के जीवन में साढ़ेसाती और ढैय्या की वजह से होने वाली सभी कष्ट दूर होते हैं। शास्त्रों में वर्णिंत कथा के अनुसार एक बार हनुमान जी ने शनि महाराज को कष्टों से मुक्त कराकर उनकी रक्षा की थी। इसलिए शनिदेव ने उन्हें यह वचन दिया था कि हनुमान जी की उपासना करने वालों को वह कभी कष्ट नहीं देंगे। उनके सारे कष्टों को हर लेंगे। इसलिए शनि दोष से परेशान व्यक्ति हर मंगलवार,शनिवार और खासकर हनुमान जयंती पर हनुमान जी का पूजन कर दांपत्य जीवन में कलह, व्यापार में नुकसान, नाैकरी आदि से जुड़ी परेशानियों जैसी अन्य प्रकार की दिक्कतों से मुक्ति पा सकते हैं।

सुबह तांबे के लोटे में जल और सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को चढ़ाएं

मंगलवार और शनिवार के दिन “श्री हनुमते नमः मंत्र” का जप करें। सुबह स्नान करने के साफ़ वस्त्र धारण करें और तांबे के लोटे में जल और सिंदूर मिलाकर हनुमान जी को अर्पित करें। हनुमान जी को चोला चढ़ाएं। बंदरों को फल, चना और गुड़ खिलाएं। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ कर चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर श्री हनुमान को अर्पित करें। हनुमान जी को केले का प्रसाद चढ़ाएं। गरीब लोगों की मदद करें उन्हें दान-दक्षिणा दें और भोजन कराएं। रोगियों की सेवा करें। ऐसा करने से व्यक्ति दांपत्य जीवन में कलह, व्यापार में नुकसान, नाैकरी आदि से जुड़ी परेशानियों जैसी अन्य प्रकार की दिक्कतों से मुक्ति पा सकते हैं।