shivlingb par jal chadhane ka sahi tarika

ऐसी मान्यता है की सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन सभी शिव भक्त भोलेनाथ की पूजा-आराधना और व्रत कर मनवांछित फल प्राप्त करते है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग भगवान् शिव और माता पारवती का आदि – अनादि रूप है। यह पुरुष और स्त्री की समानता का प्रतीक भी है। लिंग शब्द का अर्थ है – चिन्ह ,निशानी या प्रतीक।

वैसे तो शिवलिंग पर जल तो सभी चढ़ाते है किन्तु शास्त्रों में शिवलिंग पर जल चढ़ाने के कुछ नियम बताये गए हैं जिसेक अनुसार शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय हमें कुछ बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। अगर सही तरीके से शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाया जाता तो अच्छे परिणाम के बजाय अशुभ परिणाम मिल सकते हैं। तो आइये जानते है शास्त्रों में बताया गया सही तरीका क्या है –

शिवलिंग पर ऐसे चढ़ाएं जल :

  1. सबसे पहले आप पूर्व -उत्तर दिशा की ओंर मुख करके बैठ जाये और शिवलिंग पूजा की सामग्री को इकठ्ठा कर लें।
  2. सामग्री में जल, गंगाजल, रोली, चावल, दूध और चन्दन ये सब सामग्री अवश्य ज़रूर होनी चाहिए।
  3. इसके पश्चात शिवलिंग की दाहिनी तरक दीपक जलाये। थोड़ा सा जल हाथ में लेकर इन तीन मन्त्रों का उच्चारण कर उस जल को ग्रहण कर ले – (“ॐ मृत्युभजाय नमः, ॐ नीलकंठाय नमः, ॐ रुद्राय नमः”) ।
  4. इसके बाद हाथ धोएं और “ॐ नमः शिवाय ” का उच्चारण करते हुए बाई ओर से जल चढ़ाये।
  5. अब इसी मंत्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर जनेऊ चढ़ाएं और उसके बाद शिवलिंग पर चन्दन का तिलक लगा दें।
  6. फिर चावल और पुष्प अर्पण करके, मीठे का भोग लगा दे। भांग, धतूरा एवं बेलपत्र शिवलिंग पर चढ़ाये फिर शिव की आरती कर प्रसाद ग्रहण कर ले।
  7. शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन बातों का विशेषकर ध्यान रखें :
  8. कभी भी शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जलाधारी को लांघा नहीं जाता। ऐसा करना धर्म ग्रंथों में निषिद्ध बताया गया है।

शिवलिंग पर हल्दी या मेहंदी भूलकर भी न चढ़ाएं-

  • शिवलिंग पर कभी भी शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • पूजा करते समय शिवलिंग के ऊपरी हिस्से को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  • तुलसी को भगवान विष्णु ने पत्नी रूप में स्वीकार किया है। इसलिए तुलसी को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • हमेशा याद रखें कि शिवलिंग पर जल तांबे के लोटे से चढ़ाया जाता है, जबकि पीतल के लोटे से दूध चढ़ाया जाता है।
  • तिल या तिल से बनी कोई वस्तु भी भगवान शिव को अर्पित नहीं करनी चाहिए। इसे भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ माना जाता है, इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित करना चाहिए।
  • उबले हुए दूध से शिवलिंग का अभिषेक नहीं करना चाहिए। शिवलिंग का अभिषेक सदैव ठंडे जल और कच्चे दूध से करना चाहिए।
  • भगवान शिव को नारियल तो चढ़ा सकते हैं लेकिन नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। इससे धन की हानि होती ह।
  • केवड़ा तथा चम्पा के फूल न चढ़ाएं। गुलाब और गेंदा किसी पुजारी से पूछकर ही चढ़ाएं। कनेर, धतूरे, आक, चमेली, जूही के फूल चढ़ा सकते हैं।
  • शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं किया जाता, सामने रखा गया प्रसाद अवश्य ले सकते हैं।
  • शिवलिंग के पूजन से पहले पार्वतीजी का पूजन करना जरूरी है।